ग्वालियर
त्योहारी सीजन की दस्तक से पहले ही आम आदमी की रसोई का स्वाद कड़वा होने लगा है। शकर के दाम में ऐतिहासिक तेजी हुई है। थोक में शकर 4,650 से 4,700 रुपए प्रति क्विंटल तो फुटकर बाजार में कीमत 48 से 49 रुपए प्रति किलो पहुंच गई। शकर खांडसारी एसोसिएशन ग्वालियर के मनीष बांदिल की मानें तो जुलाई की शुरुआत के साथ ही भाव अप्रत्याशित उछले हैं। राष्ट्रीय व्यापारिक कल्याण बोर्ड के सदस्य रमेश खंडेलवाल ने बताया, गन्ने के समर्थन मूल्य में वृद्धि व एथेनॉल उत्पादन पर सरकार का बढ़ता जोर इसका कारण है। इससे मिलों का फोकस शकर उत्पादन से हटकर एथेनॉल पर हो गया।
इन तीन कारणों से महंगी हुई मिठास
एथेनॉल उत्पादन पर बढ़ता जोर: सरकार पेट्रोल में मिश्रण के लिए एथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा दे रही है। इसमें बड़े पैमाने पर गन्ने का उपयोग हो रहा है। चीनी (Sugar Price Ethanol Production) मिलों में कच्चे माल की सप्लाई प्रभावित हुई।
गन्ने के समर्थन मूल्य में वृद्धि: अधिकांश राज्यों में गन्ने का समर्थन मूल्य बढऩे से उत्पादन लागत में इजाफा हुआ है। इसका सीधा असर शकर की कीमतों पर दिख रहा है।
12 साल में सबसे कम जून की बारिश: इस वर्ष जून में 12 साल की तुलना में सबसे कम वर्षा हुई। देश में सामान्य से 38त्न कम वर्षा व जुलाई में भी कमजोर मानसून की आशंका से शकर उत्पादन 80 लाख टन तक कम हो सकता है।
कैसे बनाया जाता है एथेनॉल? भारत में किससे तैयार हो रहा?
एथेनॉल बनाने वाली सामग्री को फीड स्टॉक (Sugar Price Hit Record 2026) कहा जाता है। कई तरह के एथेनॉल उत्पादन संयंत्र अलग-अलग फीडस्टॉक का उपयोग करते हैं। इसके लिए मक्का, गेहूं या अन्य प्रकार के कच्चे माल का इस्तेमाल किया जाता है। इन सभी से एथेनॉल बनाने की प्रक्रिया एक ही जैसी होती है। जबकि भारत में गन्ने का इस्तेमाल किया जा रहा है। यह प्रक्रिया उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे गन्ना उत्पादक राज्यों में शुरू होती है। पकने के बाद गन्नों की कटाई की जाती है। इसके बाक प्रसंस्करण के लिए चीनी मिलों और डिस्टिलरी में ले जाया जाता है।
जानें गन्ने से एथेनॉल बनाने की प्रक्रिया से पेट्रोल पंप तक का सफर
चीनी मिल में गन्नों को पेराई मशीनों में डाला जाता है। यह गन्ने का रस निचोड़ लेती हैं। यह रस चीनी और एथेनॉल के उत्पादन के लिए आधार सामग्री तैयार होती है।
गन्ने के रस को संशोधित कर चीनी बनाई जाती है। इसी प्रक्रिया के दौरान गुड़, नामक एक गाढ़ा गहरे रंग का सिरप उप उत्पाद के रूप में मिलता है। गुड़ परम्परागत रूप से भारत में एथेनॉल उत्पादन के लिए सबसे महत्वपूर्ण कच्चे माल में से माना जाता है।
मॉडर्न एथेनॉल संयंत्र गुड़ और गन्ने के रस दोनों से एथेनॉल का उत्पादन किया जा सकता है। इन कच्चे माल को आसवन संयंत्रो तक पहुंचाया जाता है जहां इनले जैव ईंधन एथेनॉल शुरू किया जाता है।
कच्चे माल के मिश्रण में सबसे पहले खमीर उठाया जाता है। फिर सूक्ष्मजीव शर्करा का सेवन करते हैं और प्राकृतिक किण्वन प्रक्रिया द्वारा उन्हें अल्कोहल में बदला जाता है। उत्पादन की विधियों (Sugar Price break record 2026) के आधार पर यह चरण चंद घंटों से लेकर कुछ दिन तक का हो सकता है।
किण्वित द्रव में अल्कोहल, पानी और अन्य यौगिक होते हैं। अब आसवन विधि से अल्कोहल को अलग कर लिया जाता है और फिर सांद्रित किया जाता है। इस विधि से उच्च शुद्धता वाला एथेनॉल तैयार होता है।
संयंत्र से निकाले जाने से पूर्व एथेनल की गुणवत्ती की कड़ी जांच होती है। इसके बाद उत्पादक शुद्धता स्तर, रासायनिक संरचना और ईंधन के मानकों के अनुपालन की जांच कर सुनिश्चित करते हैं कि उत्पाद सरकारी विनिर्देशों के पूरा करता है या नहीं।
मंजूरी के बाद एथेनॉल को टैंकरों के माध्यम से तेल विपणन कंपनियों के डिपो तक पहुंचाया जाता है। ये सुविधाएं ईंधन के उपभोक्ताओं तक पहुंचने से पहले मिश्रण प्रक्रिया संभालती हैं।
अंतिम चरण में अनुमोदित मिश्रण अनुपात के मुताबिक एथनॉल (Sugar Price Hike making fuel) को पेट्रोल में मिलाया जाता है। फिर इस मिश्रित ईंधन को देशभर के पेट्रोल पंपों पर वितरित कर दिया जाता है।