नाटक खत्म, संदेश शुरू: वनों के महत्व और जल संरक्षण पर जागरूकता मंचों ने बांधा समां

बीजापुर.

बीजापुर के अति अंदरूनी इलाकों से अब बदलाव की नई तस्वीर सामने आ रही है। जो गांव कभी नक्सली प्रचार के केंद्र माने जाते थे, वहां अब जनजागरूकता की गूंज सुनाई दे रही है। पहले जहां भय के साए में चेतना नाट्य मंडलियों का मंचन होता था, अब वहां वन संरक्षण के संदेश दिए जा रहे हैं।

ग्रामीण पहली बार खुले मन से नुक्कड़ नाटक देख रहे हैं और उत्साह से भागीदारी कर रहे हैं। कार्यक्रमों में जंगलों में आग नहीं लगाने और महुआ संग्रहण में सावधानी बरतने की अपील की गई। तेंदूपत्ता तोड़ाई के दौरान वन्यजीवों को नुकसान नहीं पहुंचाने का संदेश भी दिया गया। हल्बी, गोंडी, हिंदी और तेलुगु भाषा में ग्रामीणों को जागरूक किया गया। वनों के महत्व, जल संरक्षण और पर्यावरण संतुलन पर विशेष जानकारी दी गई।

इंद्रावती टाइगर रिजर्व जैसे संवेदनशील क्षेत्र में यह अभियान बड़ा संदेश माना जा रहा है। जहां कभी बंदूक की भाषा थी, वहां अब संवाद की संस्कृति लौट रही है। बीजापुर की यह तस्वीर बताती है कि शांति आने पर विकास खुद रास्ता बना लेता है। नक्सल प्रभावित इलाकों में यह बदलाव आने वाले समय की उम्मीद बन गया है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *